जयराम सरकार के महत्वाकांक्षी लक्ष्य

Opinion

चुनावी आगोश में हिमाचली नब्ज पर हाथ रखे नौकरशाही का ही कमाल है कि आचार संहिता के दौरान अहम फैसले हो रहे हैं। सरकार द्वारा लिए गए फैसलों पर अमल की इबारत लिखने का जज्बा परवान चढ़ रहा है, तो इस निरंतरता को तसदीक किया जाएगा। दिहाड़ीदार व अनुबंध कर्मियों के नियमितीकरण की फाइल का ओके होना एक वर्ग विशेष के लिए सुखद अनुभूति है। कुछ इसी तरह के उद्देश्यों का हिसाब चुनाव के इस दौर में हो रहा है और जहां सरकारी मशीनरी की काबिलीयत एक नए अंदाज में पेश है। जयराम सरकार के महत्वाकांक्षी लक्ष्यों में सबसे बुलंद तस्वीर इन्वेस्टर मीट की सफलता पर निर्भर करती है और इसलिए आचार संहिता के दौर में कार्य योजना पर सक्रियता का परिणाम सामने आएगा। कहना न होगा कि इन्वेस्टर मीट के लक्ष्यों पर घड़ी की सूइयां अगर सरक रही हैं, तो संबंधित अधिकारी अपने कौशल के मजमून को सक्रिय बनाए हुए हैं। काफी दारोमदार विदेशी निवेश पर है, लिहाजा कोशिशों की पगडंडियों पर, आचार संहिता की पहरेदारी से अलग सफर जारी है। यह इसलिए भी कि जब तक लोकसभा चुनाव के परिणाम आएंगे और सरकार अपने तख्त पर ताज पहनकर बैठेगी, तब तक अधिकारियों की ओर से रोड मैप तैयार हो चुका होगा। बहरहाल इस लक्ष्य की पड़ताल में कई क्षेत्र अपने अस्तित्व की नई बुनियाद रखेंगे, लेकिन यह आवश्यक है कि निवेश पूरे हिमाचल की स्थिति-परिस्थिति के बीच संतुलन कायम रखे। अभी तक का अनुभव यह बताता है कि शिमला में बैठकर जो फाइलें चलीं, वे परवाणू, सोलन व बीबीएन में ही हाथ रंगती रहीं, जबकि हिमाचल का एक बड़ा हिस्सा निवेश के आगे अनाथ है या रोजगार की भूमिका में निवेश साबित ही नहीं हुआ। ऐसे में शहरी निवेश की पलकें अगर खुलती हैं, तो हिमाचल अपनी सूरत व नागरिक सुविधाएं संवार पाएगा। चंडीगढ़ के साथ पंजाब-हरियाणा में विकसित रीयल एस्टेट में अगर एक मिनी हिमाचल बस रहा है, तो इस निवेश को क्या कहेंगे। कायदे से ऊना में एक आधुनिक शहर की हस्ती में हिमाचल अपने ही निवेश की हकीकत बता सकता था, लेकिन यह सोच ही पैदा नहीं हुआ। निजी विश्वविद्यालय अगर खुले, तो आधे से अधिक केवल एक ही जिला यानी सोलन में समाहित हो गए। निवेश की राह केवल एक प्रस्ताव नहीं, बल्कि क्षेत्रीय संतुलन भी है। इसमें पर्यटन, उद्योग, शिक्षा-चिकित्सा के अलावा शहरी विकास की संभावनाएं कहीं अधिक हैं। धार्मिक पर्यटन की भूमिका में पैदा होते रोजगार को अगर नए निवेश की व्यापकता में समझा जाए तो धार्मिक नगरियों के विस्तार की संभावना बढ़ जाती है। प्रदेश को नागरिक समुदाय की अभिलाषा में संवारते हुए भी यह देखना होगा कि आर्थिक संपन्नता कहीं हमें कंकरीट के जंगल या वाहनों की कतार में रोक ही न दे। ऐसे में पार्किंग, मनोरंजन के अलावा इन्वेस्टमेंट जोन विकसित करते हुए शहरी विकास के जरिए सकल घरेलू उत्पाद बढ़ाने की राह चुननी होगी। चुनावी आचार संहिता के बीच जीवन की मर्यादा और प्रदेश की निरंतरता को कायम रखने की जिम्मेदारी का निर्वहन अगर सही परिपे्रक्ष्य में पूरा होता है, तो यह कालखंड पर्दे के पीछे की सक्रियता भी कायम करेगा। चुनावी रौनक के बीच पर्यटक सीजन का मूल्यांकन अपनी नई चुनौतियों के साथ होगा, तो समीक्षारत प्रयास कमोबेश हर विभाग की निगरानी में दायित्व निभाएंगे। इस दौरान वार्षिक परीक्षाओं के परिणाम और प्रवेश परीक्षाओं के जरिए मानव संसाधन की पड़ताल होगी, तो ग्रीष्मकालीन चुनौतियों के बीच पर्यटक स्थलों में जलापूर्ति के साथ-साथ शिमला को अपना पुराना इतिहास बदलना है। स्कूली वर्दी के इंतजाम हों या कर्मचारी स्थानांतरण की जरूरत, आचार संहिता के दौर में सरकार का व्यावहारिक पक्ष किसी बड़े मजमून की तरह पारंगत होता है।

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