भाजपा के संकल्प पत्र में किसानों पर फोकस

Opinion

प्रभुनाथ शुक्ल
भारतीय जनता पार्टी ने सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में आखिरकार अपना घोषणा पत्र जारी कर दिया। पार्टी ने इसका नाम संकल्प पत्र रखा है। घोषणा पत्र समिति के अध्यक्ष और गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने पार्टी के संकल्प पत्र पर विस्तार से प्रकाश डाला। इस दौरान वित्त मंत्री अरुण जेटली, विदेश मंत्री सुषमा स्वाराज के साथ पार्टी अध्यक्ष अमित शाह भी मौजूद थे। भाजपा ने अपने संकल्प पत्र को तैयार करने में किसानों का विशेष खयाल रखा है। आजादी के 75 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में पार्टी ने अपने संकल्प पत्र में 75 संकल्पों की बात रखी है। संकल्प पत्र में कुछ बातें बेहद अच्छी और नीतिगत हैं। घोषणाएं अच्छी होती ही हैं। आजादी के बाद से देश की जनता आश्वासनों और घोषणाओं की फसल काटती रही है। नतीजतन जनता का भरोसा अब घोषणा पत्रों पर कम हुआ है, लेकिन जनता इन्हें सुनने-गुनने के लिए बेबस है। भाजपा के संकल्प पत्र को चुनावी वादों से इतर नहीं माना जा सकता है। कांग्रेस ने अपने चुनावी घोषणा पत्र में किसानों को बेहद तरजीह दी है। अब भाजपा ने भी किसानों पर दरियादिली दिखाई है। भले ही किसान की धोती आजादी के बाद से अब तक घुटने से नीचे नहीं आ पाई है। यह भी गौरतलब है कि आजादी के बाद जितनी भी सरकारें आईं किसी ने भी अपने चुनावी घोषणा पत्र पर पूरी तरह अमल नहीं किया। पुराने वादे भूलकर नई घोषणाएं की जाती रही हैं। भाजपा के संकल्प पत्र में किसानों को पांच साल के लिए एक लाख का कृषि लोन जीरो फीसदी ब्याज पर देने की घोषणा की गयी है। लघु एवं सीमांत किसानों के लिए पेंशन योजना भी लागू करने का वादा किया गया है। उम्मीद जताई गई है कि इससे कृषि क्षेत्र में अहम क्रांति आएगी। साथ ही किसानों की बढ़ती आत्महत्याओं पर रोक लगेगी। इसके अलावा देश में अब तक लंबित पड़ी सिंचाई परियोजनाओं को पूरा करने का वादा किया गया है। सभी भू-लेखों का डिजीटलाइजेशन करने का भी वादा किया गया है। कांग्रेस ने किसान आयोग बनाने की बात कही है। निश्चित तौर पर यह कांग्रेस के 72 हजार की काट खोजती यह घोषणा दिखती है। कांग्रेस ने सिर्फ 20 फीसदी गरीबों को ही इस योजना का लाभ देने का वादा किया है। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना में संशोधन किया गया है। अभी तक यह केवल दो हेक्टेयर के किसानों के लिए लागू की गयी थी, लेकिन अब इसकी कोई सीमा निर्धारित नहीं होगी इसका लाभ अब देशभर के किसानों को मिल सकेगा। भाजपा ने संकल्प पत्र में 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने की बात कही है। पार्टी यह बात पहले से कहती आ रही है। भाजपा के संकल्प पत्र में ग्रामीण विकास को लेकर बड़ी बात कही गयी है। इसमें विकास में असंतुलन की खाई पाटने की अहम बात है। देश के विकास में यह अहम है। भाजपा दोबारा सत्ता में आयी तो वह 25 हजार करोड़ का बजट ग्रामीण विकास पर खर्च करेगी। भाजपा का व्यापारी वर्ग खास वोटर रहा है। उसे देखते हुए पार्टी ने अपने संकल्प पत्र में व्यापारियों पर विशेष ध्यान दिया है। कहा गया है कि व्यापारियों के लिए अलग से राष्ट्रीय व्यापार आयोग गठित किया जाएगा। छोटे व्यापारियों और दुकानदारों को 60 साल की उम्र के बाद पेंशन दी जाएगी। अपने आप में यह योजना अभूतपूर्व है। आम तौर पर छोटे व्यापारियों की समस्याओं पर ध्यान नहीं दिया जाता है। जीएसटी की मार खाये छोटे व्यापारियों के लिए सरकार की चुनावी सौगात अहम है। इसके अलावा देश में सभी चुनाव एक साथ कराने की बात भी कही गई है। यह एक सराहनीय पहल है। हालांकि सरकार इसके पूर्व में यह बात रख चुकी है। लेकिन अभी तक इस पर राजनीतिक दलों की तरफ से आमराय नहीं बन पायी है। आने वाले दिनों में ऐसा होता है तो यह एक अच्छी पहल होगी। एक साथ चुनाव होने से देश का पैसा बर्बाद होने से बचेगा, जिसका लाभ देश को मिलेगा। कांग्रेस ने जीडीपी का छह फीसदी हिस्सा शिक्षा क्षेत्र में खर्च करने का वादा अपने घोषणा पत्र में किया है। यह कोई मामूली निर्णय नहीं कहा जा सकता है। देश के विकास में यह अहम मसला है। भाजपा उसकी काट में इंजीनियरिंग, एलएलबी समेत दूसरे क्षेत्रों में सीट बढ़ाने का वादा किया गया है। लेकिन रोजगार और शिक्षा के लिए वह कोई बड़ा एलान नहीं कर पायी है। कांग्रेस ने नौजवानों को रोजगार की बात कही है जबकि भाजपा इस पर कुछ अधिक कहती नहीं दिखती है। रेलवे के क्षेत्र में अहम घोषणा करते हुए ब्राडगेज लाइनों के विस्तार की बात कही गयी है। स्वास्थ्य क्षेत्र में भी अहम बात रखी गयी है। पोस्ट ग्रेजुयेट कालेजों को बढ़ाने के साथ नए अस्पतालों के निर्माण की बात भी कही गई है। धर्म को भी साधने की पूरी कोशिश की गयी है। जैन धर्म से जुड़े तीर्थस्थलों को सड़क मार्ग से जोडऩे की प्राथमिकता है। असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले मजदूरों के लिए बीमा की सुविधा है। पार्टी असंगठित क्षेत्रों के कामगारों के लिए तीन हजार रुपये की पेंशन देने का पूर्व में एलान कर चुकी है। सभी को मकान और हर घर को बिजली उसकी प्राथमिकता में हैं जिस पर सौभाग्य एवं प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत काम चल रहा है। प्रदूषण की समस्या से निजात के लिए कचरा प्रबंधन की भी बात शामिल है। यह विशेष बात है। भाजपा ने राष्ट्रवाद की प्रतिबद्धता को दोहराया है। इसके अलावा आतंकवाद पर जीरो टॉलरेंस की बात कही गयी है। यह उसकी पूर्व नीतियां रही हैं। इसमें कुछ खास नहीं दिखता है। राम मंदिर पर भी वही पुराना राग अलापा गया है। अवैध घुसपैठ को प्रतिबंध करने की बात कही गयी है। लेकिन पांच साल के दौरान इस पर क्या कार्रवाई की गयी है, यह बताने की आवश्यकता नहीं है। तीन तलाक को भी शामिल किया गया है। संकल्प पत्र में धारा-35 ए को छूने की कोशिश की गई है। पूरे दावेदारी के साथ यह बात नहीं रखी गयी है कि वह सत्ता में आने के बाद इसे हटा देगी। गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने भले ही कहा है कि इसे तैयार करने में समिति ने देश की राय का ख्याल रखा है, लेकिन यह उतना तर्कसंगत नहीं दिखता है। अब कांग्रेस और भाजपा के घोषणा पत्र को देश की जनता किस स्तर पर लेती है यह वक्त बताएगा। लेकिन संकल्प पत्र में किसान, ग्रामीण विकास, व्यापारी वर्ग और शिक्षा को विशेष तरजीह देकर सरकार ने अच्छा कदम उठाया है। पार्टी ने यह संकेत भी दिया है कि 2019 में उसका मुख्य चुनावी एजेंडा राष्ट्रवाद और आतंकवाद ही रहेगा।

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