‘मैं कुंती तो नहीं’ उपन्यास का लोकार्पण

उत्तर प्रदेश देश लखनऊ

लखनऊ। अखिल भारतीय साहित्य परिषद की ओर से बुधवार को प्रेस क्लब में ‘साहित्य’ का सार्मथ्य विषय पर विमर्श व डॉ. मंजू शुक्ल की दो कृतियां ‘मैं कुन्ती तो नहीं’ उपन्यास व ‘विकासशील भारत की धुरी हैं उद्यमी महिलाएं’ का लोकार्पण हुआ। हिन्दी संस्थान की सम्पादक डॉ. अमिता दुबे ने डॉ. मंजू की कृतियों पर चर्चा करते हुए कहा कि यह उपन्यास आधुनिक परिवेश में लिखा है, जो नारी शक्ति को बढ़ावा देगा व समाज में सकारात्मक बदलाव लाएगा। अमिता ने कहा कि महिलाओं के आर्थिक स्वावलम्बन से पूरे परिवार को भी आर्थिक लाभ होता है।’विकासशील भारत की धुरी हैं उद्यमी महिलाएं’ ग्रामीण उद्योगों और स्वरोजगार में लगी श्रमिक महिलाओं की सामाजिक स्थिति में सुधार लाने में व पारंपरिक उद्योगों के आधुनिकीकरण और दक्षता प्रशिक्षण पर बल देता है। इस मौके पर डॉ. अमिता दुबे ने डॉ. मंजू शुक्ल के साथ 21 प्रतिष्ठित साहित्कारों को सम्मानित किया।

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