श्रीराम जन्मभूमि: मध्यस्था पैनल की समाधान की कवायद शुरू

अन्य बड़ी खबरें

गोमती आवाज ब्यूरो
अयोध्या। वर्षों पुराने रामजन्मभूमि बाबरी मस्जिद मामले के समाधान के लिए सुलह समझौते की कोशिशों के तहत बुधवार को पक्षकारों के साथ आठ घंटे तक विचार-विमर्श हुआ। डॉ राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय के तकनीकी एवं प्रौद्योगिकी संस्थान स्थित सभागार में आयोजित इस विचार-विमर्श को पूरी तरह गोपनीय रखा गया। सुप्रीम कोर्ट की ओर से रिटायर न्यायमूर्ति एफ.एम.आई कलीफुल्ला के नेतृत्व वाली 3 सदस्य समिति ने पक्षकारों से विभिन्न पहलुओं पर मंत्रणा की। गुरुवार को भी मंत्रणा जारी रहने की उम्मीद बताई जा रही है। देश की सर्वोच्च अदालत सुप्रीम कोर्ट की ओर से कई दशक पुराने अयोध्या के श्रीरामजन्म भूमि बाबरी मस्जिद विवाद को सुलह समझौते के तहत निपटाने के लिए रिटायर्ड जस्टिस कलीफुल्ला की अध्यक्षता में सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता श्री राम पंचू और आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर की तीन सदस्यीय समिति गठित की गई थी। समिति को 4 सप्ताह में अंतरिम रिपोर्ट तथा 8 सप्ताह में अपनी अंतिम रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट के सामने पेश करनी है। प्रक्रिया को परवान चढ़ाने के लिए बुधवार को समिति ने अवध विश्वविद्यालय परिसर में कवायद शुरू की। सुलह समझौते के बिंदुओं को तलाशने तथा पक्षकारों की मंशा जानने के लिए समिति की ओर से पक्षकारों को बुलाया गया था। सुबह 9:30 बजे से पक्षकारों के वाहन एक-एक कर अवध विश्वविद्यालय के तकनीकी और प्रौद्योगिकी संस्थान पहुंचे और सभी को जांच और तलाशी के बाद भीतर जाने दिया गया। सुबह लगभग 10:00 बजे मध्यस्था कमेटी के समक्ष मामले को सुलझाने के लिए विभिन्न पहलुओं पर विचार-विमर्श शुरू हुआ। 8 घंटे तक पक्षकारों के बीच विभिन्न विषयों पर मंत्रणा होती रही। शाम 6:00 बजे मध्यस्थता कमेटी के साथ विचार-विमर्श को पहुंचे बस करो तथा उनके अधिवक्ताओं की वापसी का क्रम शुरू हुआ। कोई हाथ हिला सीताराम बोल निकला: सुप्रीम कोर्ट की ओर से तय कमेटी के समक्ष हुए विचार-विमर्श को गोपनीय रखने की ताकीद की गई थी। इसका पूरा प्रभाव पक्षकारों पर भी दिखाई पड़ा। राम जन्म भूम बाबरी मस्जिद विवाद के मामले में अक्सर बैठकों से लेकर अधिग्रहीत परिसर की खुदाई समेत अन्य मौकों पर मीडिया से बात करने वाले पक्षकार और उनके अधिवक्ता पूरी तरह चुप्पी साधे रहे। मध्यस्था कमेटी के साथ बैठक के बाद पक्षकार अपने वाहनों से निकले तो कोई हाथ हिलाकर चलता बना तो कोई सीताराम बोल मौके से निकल गया। कुछ पक्षकार अपने वाहन से उतरे और मीडियाकर्मियों से हालचाल लिया, लेकिन कुछ बोलने से साफ इनकार कर दिया।
छावनी में तब्दील रहा पूरा परिसर: अयोध्या विवाद के समाधान के लिए सुलह समझौते को अंजाम तक पहुंचाने के लिए डॉ. राम मनोहर अवध विश्वविद्यालय का तकनीकी एवं प्रौद्योगिकी संस्थान चुना गया था। जिला प्रशासन की ओर से मंगलवार को ही पूरे परिसर को छावनी क्षेत्र में तब्दील कर दिया गया था। आने जाने वाले मार्गों पर बैरिकेडिंग लगाई गई थी और सुरक्षा दस्ते की तैनाती हुई थी। केवल पक्षकारों को ही भीतर जाने दिया जा रहा था। पक्षकारों तथा उनके अधिवक्ताओं या अन्य और वाहनों की सघन तलाशी के बाद ही भीतर प्रवेश दिया जा रहा था। जिला पुलिस की ओर से एसपी सिटी के नेतृत्व में भारी तादात में पीएसी और पुलिस बल की तैनाती की गई थी। आपात स्थिति से निपटने के लिए मौके पर फायर बिग्रेड और अन्य दस्तावेज तैनात किया गया था। हेलीकॉप्टर से पहुंचे थे श्री श्री रविशंकर: मध्यस्थता कमेटी में शामिल किए गए आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर स्पेशल हेलीकॉप्टर से अयोध्या आए। कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच उनका हेलीकॉप्टर हवाई पट्टी पर लैंड हुआ। वहीं रिटायर न्यायमूर्ति कली फुल्ला और वरिष्ठ अधिवक्ता श्रीराम पंचू सड़क मार्ग से अयोध्या आए थे। जिला प्रशासन की ओर से तीनों के रुकने की व्यवस्था अवध विश्वविद्यालय के वीआईपी गेस्ट हाउस में की गई है। कमेटी की मदद के लिए जिला प्रशासन की ओर से स्टेनोग्राफर और टाइपिस्ट समेत अन्य स्टाफ मुहैया कराया गया है। मध्यस्थता समिति के पदाधिकारियों ने आयोध्या पहुंच विवादित परिसर का निरीक्षण भी किया है। हिंदू पक्ष से भी उठे सवाल: मध्यस्थता कमेटी में शामिल किए गए आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर के नाम को लेकर बाबरी मस्जिद मामले के मुद्दई इकबाल अंसारी ने सवाल उठाया था। यही सवाल मुस्लिम पक्षकारों की लखनऊ के इस्लामिया कॉलेज में हुई बैठक में भी उठा था। अब हिंदू पक्ष ने भी श्री श्री रविशंकर के नाम पर सवाल उठाया है। पूर्व में निर्मोही अखाड़े की ओर से सुप्रीम कोर्ट में पैरवी करने वाले नाका हनुमानगढ़ी के पुजारी रामदास और हनुमानगढ़ी के नागा राजू दास का कहना है कि पैनल में श्री श्री रविशंकर को रखने का कोई औचित्य नहीं है। वह मैं तो वैष्णव संप्रदाय से जुड़े हैं और न ही रामानंद संप्रदाय से। उनका अयोध्या की संत परंपरा से भी कोई लेना देना नहीं है। पुजारी रामदास का कहना है कि मध्यस्था पैनल में अगर रखना ही था तो छोटी छावनी के महंत नृत्य गोपाल दास को रखना चाहिए था।

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *