मेडिकल कॉलेजों को मिलेगी टीबी की नई दवा बेडाक्यूलिन

उत्तर प्रदेश देश लखनऊ

विश्व भर में टी.बी रोग से पीडि़त मरीजों में से 27 प्रतिशत मरीज हमारे देश में हैं
गोमती आवाज ब्यूरो
लखनऊ। उत्तर प्रदेश के 13 मेडिकल कॉलेजों में टीबी की नई दवा बेडाक्यूलिन उपलब्ध होगी। जल्द ही यह दवा प्रदेश भर के मेडिकल कॉलेज में उपलब्ध होगी और यहां इलाज के लिए आने वाले मरीजों को बेडाक्यूलिन दी जायेगी। यह जानकारी उत्तर प्रदेश के क्षय नियंत्रण अधिकारी डॉ. संतोष गुप्ता ने दी। वह गुरुवार को केजीएमयू में आयोजित कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। कार्यशाला में प्रदेश भर के समस्त 40 मेडिकल कॉलेज, सरकारी एवं गैर सरकारी प्रतिनिधियों एवं जिला क्षय रोग अधिकारी ने प्रतिभाग किया। कार्यशाला में विभिन्न मेडिकल कॉलेज में क्षय रोग नियंत्रण कार्यक्रम के क्रियान्वयन एवं टीबी की रोकथाम एवं इसके प्रति लोगों को जागरूक किए जाने के लिए आने वाली कठनाईयों पर विस्तृत रूप से चर्चा की गई। कार्यशाला का उद्घाटन किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. एमएलबी भटट् ने किया। उत्तर प्रदेश टास्क फोर्स क्षय नियंत्रण के चेयरमैन डॉ. सूर्यकांत की सराहना करते हुए कहा कि टी.बी. को समाप्त करना विश्व, देश तथा समाज की आवश्यकता है और टीबी को समाप्त करने के लिए उत्तर प्रदेश मुख्य भूमिका निभाने का कार्य करेगा क्योंकि यहां से आए नतीजे पूरे देश के प्रभावित करेंगे। डॉ. सूर्यकांत ने बताया कि विश्व भर में टी.बी रोग से पीडि़त मरीजों में से 27 प्रतिशत मरीज हमारे देश में हैं और 13 मार्च 2018 को दिन इस रोग को समाप्त करने के लिए मील का पत्थर साबित होगा। इसी दिन देश के प्रधानमंत्री ने वर्ष 2025 तक इस बीमारी को खत्म करने का संकल्प लिया था। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि यह जिम्मेदारी बहुत बड़ी है लेकिन इसे पूरी मेहनत और लगन से निभाना होगा। इस अवसर पर स्टेट टास्क फोर्स, नार्थ जोन के चेयरमैन डॉ. एके भरद्वाज ने हिमाचल प्रदेश सरकार का उदाहरण देते हुए बताया कि भारत सरकार के साथ ही राज्य सरकारों को भी टीबी को जड़ से खत्म करने के लिए वित्तीय मदद करने के लिए आगे आना होगा। इस अवसर पर राष्ट्रीय टास्क फोर्स के वाइस चेयरमैन डॉ.राजेन्द्र प्रसाद ने बताया कि उत्तर प्रदेश में टीबी रोग से पीडि़त मरीजों की संख्या देश भर के किसी भी राज्य के मुकाबले सबसे ज्यादा हैं, ऐसे में उत्तर प्रदेश को इस रोग के समूल नाश के लिए अग्रणी भूमिका निभानी होगी। उन्होंने बताया कि विश्व स्वास्थ्य संगठन ने टीबी रोग के समूल नाश के लिए 2035 की समय सीमा तय की है लेकिन भारत सरकार ने इसे 2025 में खत्म करने का दृढ़ संकल्प किया है, जो एक बड़ा कार्य है और इस संकल्प को पूरा करने में उत्तर प्रदेश बड़ी भूमिका निभाएगा। कार्यशाला में विश्व स्वास्थ्य संगठन के कंसलटेंट डॉ. उमेश त्रिपाठी, स्टेट टी.बी. डेमोंसट्रेशन सेंटर के निदेशक डॉ. शैलेन्द्र भटनागर, उत्तर प्रदेश टास्क फोर्स क्षय नियंत्रण के वाइस चेयरमैन डॉ. सुधीर चौधरी, उत्तर प्रदेश टास्क फोर्स क्षय नियंत्रण के वाइस चेयरमैन डॉ. जुबैर अहमद, केजीएमयू रेस्पेरेट्री मेडिसिन विभाग के डॉ. अजय वर्मा, डॉ. दर्शन बजाज, डॉ. मनीष सिंह आदि मुख्य रूप से उपस्थित रहे।

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