दिल्ली फतह के लिए उप्र में मोदी की ताबड़तोड़ रैली

राजनीति

गोरखपुर में मोदी भाजपा के किसान मोर्चे के सम्मेलन का करेंगे समापन
गोमती आवाज ब्यूरो
लखनऊ। लोकसभा चुनाव सिर पर हैं। सभी जानते हैं कि चुनाव में मोदी एक बड़ा फैक्टर हैं। चुनाव ‘प्रो मोदी या एन्टी मोदी’ ही होगा। राजनीतिक पार्टियां लगभग गौण होंगी। यह बात प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को भी पता है। उन्हें यह भी मालूम होगा कि यूपी फतह नहीं हुआ तो दिल्ली दूर हो सकती है इसलिए वह उत्तर प्रदेश में ताबड़तोड़ रैलियां कर रहे हैं। प्रधानमंत्री मंगलवार को अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी में थे। इससे पहले उन्होंने शुक्रवार को झांसी में बड़ी रैली की। 24 फरवरी को गोरखपुर और 27 फरवरी को राहुल गांधी के संसदीय क्षेत्र अमेठी में रैली सम्बोधित करेंगे। गोरखपुर में मोदी भाजपा के किसान मोर्चे के सम्मेलन का समापन करेंगे। राहुल गांधी के संसदीय क्षेत्र अमेठी में प्रधानमंत्री की रैली को सफल बनाने के लिये केन्द्रीय मंत्री स्मृति ईरानी और पार्टी के प्रदेश पदाधिकारी गोविन्द नारायण शुक्ल एड़ी चोटी का जोर लगाये हैं। वाराणसी में आज मोदी ने ‘मन चंगा तो कठौती में गंगा’ का प्रसिद्ध मंत्र देने वाले दलितों के आदर्श संत रविदास की जन्मस्थली जाकर एक संदेश दिया। वह बतौर प्रधानमंत्री संत रविदास की जन्मस्थली दूसरी बार गये हैं। चुनावी दृष्टि से इस राज्य में मोदी के मुकाबले शायद ही कोई रहता लेकिन सपा-बसपा गठबन्धन और प्रियंका गांधी के महासचिव बनने के बाद से मोदी की चुनौती बढ़ी है। आमतौर पर सपा को पिछड़ों और बसपा को दलितों की पार्टी माना जाता है। इन दोनों वर्गों की जनसंख्या राज्य में तकरीबन पचास फीसदी के आस-पास है। दोनों के एक मंच पर आने से इनके साथ मुस्लिम भी जुड़ सकते हैं। यूपी में मुसलमानों की आबादी करीब 18 फीसदी है। अधिकांश दलित, पिछड़े और मुस्लिम एकजुट होते हैं तो यह एक बड़ी राजनीतिक ताकत बनेंगें। चुनाव में इन्हें हरा पाना मोदी और उनकी पार्टी के लिए काफी मुश्किल रहेगा। लेकिन प्रियंका के आने के बाद भाजपा की स्थिति ठीक देखी जा रही है, क्योंकि ज्यादातर सीटों पर त्रिकोणात्मक संघर्ष की सम्भावना बढ़ गयी है। त्रिकोणात्मक संघर्ष में भाजपा को लाभ की ज्यादा संभावना है। मोदी इसे बखूबी समझ रहे हैं। इसीलिए वह अपने को पिछड़े वर्ग का बताने का कोई मौका नहीं चूक रहे हैं। संसद में उन्होंने इसकी खुलेआम घोषणा भी की। दलितों और पिछड़ों में अपनी पैठ बढ़ाने के लिए भाजपा अति दलित और अति पिछड़ा का कार्ड भी खेल रही है। भाजपा नेता आरोप लगाते हैं कि सपा शासन में केवल यादवों और बसपा शासन में दलित वर्ग की एक ही जाति का बोलबाला रहता है जबकि अन्य जातियां उपेक्षित रहती हैं। यह कहकर भाजपा अन्य जातियों को अपनी ओर आकर्षित करने की जीतोड़ कोशिश में लगी हुई है। इसी कोशिश के तहत नरेन्द्र मोदी डॉ. भीम राव आंबेडकर से जुड़े पांच स्थलों को पंच तीर्थ बना रहे हैं। कबीर पंथियों को अपनी ओर आकर्षित कर रहे हैं। गत 28 जून को इसी मकसद से वह कबीरदास की निर्वाण स्थली मगहर गये। कबीरपंथियों को आकर्षित करने की कोशिश की। मगहर कबीर पीठ के विचारदास के अनुसार देश में कबीरदास के करीब दो करोड़ अनुयायी हैं। मगहर से शुरू हुआ मोदी का चुनाव अभियान यूपी में एक महीने में 6 स्थानों तक पहुंच गया था। सामाजिक समीकरण के अनुसार विपक्षी दलों का गठबंधन भाजपा पर भारी पड़ सकता है। इसकी काट के लिए मोदी और उनकी पार्टी हर मुमकिन कोशिश करेगी। इसीलिए उन्होंने जून-जुलाई महीने में ही मगहर, आजमगढ़, मिर्जापुर, वाराणसी, शाहजहांपुर और लखनऊ में सात रैलियां कर डाली थी।

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