तीन करोड़ बच्चों को मोदी ने परोसा भोजन

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देश के 12 राज्यों में 43 रसोइयों से 17.6 लाख से अधिक बच्चों को मिड-डे मील उपलब्ध कराया जा रहा
गोमती आवाज ब्यूरो
आगरा। अक्षय पात्र ने सोमवार को वृंदावन में तीन सौ करोड़ की भोजन थाली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथ से परोसवा कर दुनिया में एक कीर्तिमान रचा है। भूख के कारण कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रह सके, यही मकसद लेकर संस्था चल रही है। केंद्र, राज्य सरकार और दानदाताओं के सहयोग से संस्था पिछले 19 साल से लगातार मिड-डे-मील का वितरण कर रही है। देश के 12 राज्यों में 43 रसोइयों से 17.6 लाख से अधिक बच्चों को मिड-डे मील उपलब्ध कराया जा रहा है। इसमें मथुरा जिले के 1.75 लाख बच्चों भी शामिल हैं। अक्षय पात्र ने वर्ष 2000 में इस संस्था का गठन कर्नाटक के ग्रामीण क्षेत्रों के गरीब बच्चों की मदद को किया था। बेंगलुरु से 1500 बच्चों को पहली बार मिड-डे मील देकर इसकी शुरुआत की गई। 12 साल तक लगातार भोजन परोसते हुए वर्ष 2012 में संस्था सौ करोड़ वीं थाली परोसकर इतिहास रचा था। चार साल बाद वर्ष 2016 में दो सौ करोड़ का आंकड़ा छुआ लिया। इस उपलब्धि को लेकर 27 अगस्त 2016 को संस्था ने बेंगलुरू में एक उत्सव मनाया था। अक्षय पात्र फाउंडेशन के चेयरमैन मधु पंडित दास ने बताया कि भोजन वितरण के लिए श्रीला प्रभुपाद से प्रेरणा मिली थी। उन्हीं की प्रेरणा से आज संस्था ने आगे बढ़ाते हुए 300 करोड़ वीं भोजन की थाली परोसी है। 14702 स्कूलों में भोजन पहुंचाने का काम संस्था कर रही है। उनका लक्ष्य वर्ष 2020 तक देशभर में करीब 50 लाख छात्रों को प्रतिदिन भोजन परोसने का है। वर्ष 2020 तक छह सौ करोड़ वीं थाली परोसने का लक्ष्य है। कर्नाटक, उत्तरप्रदेश, राजस्थान, ओडीसा, गुजरात, आंध्रप्रदेश, छत्तीसगढ़ में ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों शामिल हैं। गुजरात में 1. 50 लाख, राजस्थान में 1. 30 हजार, बेंगलूरू में 2.30 लाख, हुबली में 1.81 लाख और बेंगलूरू तीन हजार गर्भवती महिलाएं को भी शामिल किया गया है। वाइस चेयरमैन चंचलापति दास ने बताया कि लाखों बच्चों तक भोजन पहुंचाने को फाउंडेशन टेक्नोलॉजी का प्रयोग करता है। संस्था की अत्याधुनिक रसोई आज अध्ययन का एक विषय बन गई है। दुनिया भर के लोग रसोई को देखने आते हैं। अक्षय पात्र का यह कार्यक्रम आज दुनिया को सबसे बड़ा स्कूली लंच कार्यक्रम बन चुका है।

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