योगी के बजट से तिलमिलाया विपक्ष

Opinion

 सियाराम पांडेय
उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने 2019-2020 के लिए 12 प्रतिशत अधिक के बजट का प्रावधान कर अपने विपक्षियों के चेहरे पर बारह बजा दिया है। चार लाख 79 हजार 710 करोड़ का भारी भरकम बजट मायने रखता है,यह विकास के प्रति सरकार की इच्छा शक्ति का परिचायक है। देश के सबसे बड़े प्रदेश का इतना भारी-भरकम बजट तो होना ही चाहिए। इसके बाद भी विपक्ष खुश नहीं है। खुश न होना ही विपक्ष की प्रवृत्ति है। अखिलेश यादव ने कहा है कि जिसकी जैसी समझ,उसका वैसा बजट। बिल्कुल पते की बात है। चश्मा विरोध का हो तो उसमें समर्थन की गुंजाइश तो पहले ही खत्म हो जाती है। बसपा प्रमुख मायावती कह रही हैं केवल संगम स्नान से ही सरकार के पाप नहीं धुल सकते, जनता समझदार है। वह सब समझती है। विपक्षी दल इस बजट को दिशाहीन कह रहे हैं। उन्हें लग रहा है कि सरकार ने शिक्षा,स्वास्थ्य के लिए बजट में कुछ भी नहीं दिया है। किसानों के लिए कुछ भी नहीं दिया है। सुरक्षा की उपेक्षा की गई है। महिलाओं की अनदेखी की गई है। बजट में बेरोजगारों के रोजगार की चिंता नहीं है। उनकी नजर में यह बजट बेकार है। इसकी बस एक ही खासियत उन्हें नजर आई, वह यह कि बजट 2019 के लोकसभा चुनाव को लक्ष्य कर बनाया गया है। घर का बजट बनाने में आदमी के छक्के छूट जाते हैं फिर यह तो पूरे प्रदेश का बजट है। इसे बनाने में कितने दिमाग लगे होंगे। कितने अर्थशास्त्रियों से सुझाव मांगे गए होंगे? कितने नौकरशाहों ने, कितने राजनीतिज्ञों ने दिन-रात एक किए होंगे और विपक्ष ने उसे ऐसे खारिज कर दिया जैसे उसका कोई अर्थ ही न हो। बजट के प्रावधानों पर ही विचार कर लेते। बजट में नई योजनाओं के लिए 21212.95 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है। 21 हजार करोड़ कम नहीं होते। किसानों के लिए बजट में कुछ नहीं है,ऐसा कहने से पहले राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के लिए 892 करोड़, राष्ट्रीय फसल बीमा कार्यक्रम के लिए निर्धारित 450 करोड़ और उर्वरकों के भंडारण के लिए 150 करोड़ की बजटीय व्यवस्था पर ही विमर्श कर लिया जाता। सरकारी क्षेत्र की बंद पड़ी चीनी मिलें अगर 50 करोड़ के खर्च में चल जाती हैं और सहकारी क्षेत्र की चीनी मिलों को पुनर्संचालन के लिए 25 करोड़ सरकार देती है तो इससे अंतत: किसे लाभ होगा? बजट में इस बात का सुष्पष्ट उल्लेख है कि 2019-2020 में 1840 रुपये प्रति कुंतल की दर से 6 हजार क्रय केंद्रों पर किसानों का गेहूं खरीदा जाएगा। 60.51 लाख कुंतल बीज और 77.26 मीट्रिक टन उर्वरक बांटे जाएंगे। 700 करोड़ रुपये में प्रदेश में 36 नए थाने बनेंगे,पुलिस और पीएसी जवानों की प्रशिक्षण क्षमता विकसित होगी। पुलिसकर्मियों के बैरक बनेंगे तो इससे कानून व्यवस्था में सुधार नहीं होगा, पुलिस की कार्य क्षमता विकसित नहीं होगी, यह कैसे कहा जा सकता है? 700 करोड़ रुपये में पुलिसकर्मियों के लिए ए टाइप और बी टाइप के लिए आवास बनेंगे, 400 करोड़ में सात पुलिस लाइनों का निर्माण होगा,200 करोड़ में 57 फायर स्टेशनों पर आवसीय और अनावासीय भवन बनेंगे और 204 करोड़ में पुलिस का आधुनिकीकरण होगा तो इससे प्रदेश में अपराध और अपराधियों पर अंकुश नहीं लगेगा, ऐसा कैसे कहा जा सकता है? विपक्ष का आरोप है कि सरकार गोवंश संरक्षण पर और धार्मिक पर्यटन के विकास पर ही जोर दे रही है। इंसानी विकास पर उसकी दृष्टि नहीं है। उत्तर प्रदेष दुग्ध नीति के तहत 5 करोड़ रुपये का प्रावधान सरकार की दूरंदेशी नीति का परिचायक है। गोवंश संवर्धन के लिए मदिरा की बिक्री पर विशेष फीस लगाना भी विपक्ष को रास नहीं आ रहा है। दूध पीकर तन स्वस्थ होता है और शराब पीकर कमजोर। विपक्ष को प्रदेश की अवाम को यह तो बताना ही होगा कि वह उसे स्वस्थ देखना चाहता है या कि शारीरिक दृष्टि से कमजोर। सरकार ने अगर बेसहारा गोवंश के संरक्षण के लिए 165 करोड़, ग्रामीण क्षेत्रों में गोवंश संरक्षण और गोशालाओं के निर्माण के लिए 247.60 करोड़ रुपये की व्यवस्था की है तो इसमें गलत क्या है? पं. दीनदयाल लघु डेयरी योजना के तहत 10 हजार इकाइयां चलाई जानी है, इस निमित्त 64 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है। मथुरा में नई डेयरी की स्थापना पर भी 56 करोड़ रुपये खर्च होना है। पशुधन के विकास से किसान ही समृद्ध होता है। ग्राम्य विकास से भी किसान और मजदूर का विकास होता है। ग्रामीण क्षेत्र में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 6240 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है। राष्ट्रीय ग्रामीण विकास योजना के क्रियान्वयन हेतु 3488 करोड़,बंदेलखंड और विंध्य क्षेत्र के गांवों में 3 हजार करोड़ में जलपाइप लगाने की योजना, राष्ट्रीय पेयजल योजना पर 2954 करोड़ और राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन पर 1393 करोड़ का प्रावधान कर योगी सरकार ने गांवों के विकास पर अपना ध्यान केंद्रित किया है। स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण के लिए 6 हजार करोड़ का प्रावधान बड़ी सोच है। ग्रामीण क्षेत्रों में अंत्येष्टि स्थलों के विकास के लिए 100 करोड़ और 750 पंचायत भवनों के निर्माण के लिए 14 करोड़ का प्रावधान सरकार की ग्राम्य विकास के प्रति संकल्पबद्धता का परिचायक है। कांजी हाउस की स्थापना और पुनर्निर्माण पर 20 करोड़ खर्च होने हैं। ऐसा होता है तो आवारा पशुओं द्वारा किसानों की फसल का नुकसान नहीं होगा।सरकार किसी भी तरह से किसानों को नुकसान न होने देने की पक्षधर है। मौजूदा बजट इसका परिचायक है। माध्यमिक शिक्षा की उपेक्षा संबंधी विपक्ष के आरोप भी सर्वथा बेजां हैं। प्राथमिक शिक्षा के तहत समग्र शिक्षा अभियान के लिए 18485 करोड़ रुपये, मिड डे मील के लिए 2275 करोड़ रुपये, प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों में अवस्थापना सुविधाओं के विकास के लिए 500 करोड़ रुपये, विद्यार्थियों को जूता,मोजा और स्वेटर उपलब्ध कराने के लिए 300 करोड़ ,ड्रेस वितरण के लिए 40 करोड़ का प्रावधान कर योगी सरकार ने बच्चों के अध्ययन की सुगमता का पूरा ध्यान रखा है। वनटांगिया गांवों के बच्चों की शिक्षा का विचार कर वहां स्कूल खोलने के लिए सरकार ने 5 करोड़ रुपये की व्यवस्था की है। माध्यमिक शिक्षा के लिए सैनिक स्कूलों की स्थापना हेतु 26.57 करोड़, राजकीय इंटर कॉलेजों की स्थापना के लिए 10 करोड़,संस्कृत पाठशालाओं को सहायक अनुदान देने के लिए 242 करोड़ और ऐडेड संस्कृत विद्यालयों और महा विद्यालयों को 30 करोड़ के अनुदान की व्यवस्था कर सरकार ने माध्यमिक शिक्षा के विकास विस्तार की भावना का इजहार किया है। विपक्ष को आलोचना करने से पूर्व आंकड़े तो देख लेने चाहिए। महिलाओं और बच्चियों के लिए 1200 करोड़ की कन्या सुमंगला योजना, निराश्रित विधवाओं और उनके बच्चों के लिए 1410 करोड़ आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों और सहायिकाओं के मानदेय के लिए 1988 करोड़, राष्ट्रीय पोषण मिशन के लिए 335 करोड़, शबरी संकल्प अभियान के लिए 200 करोड़, किशोरी बालिका योजना के लिए 156 करोड़ और महिला सम्मान कोष के लिए 103.70 करोड़ रुपये का प्रावधान नारी जगत की समस्याओं के निराकरण का प्रयास नहीं तो और क्या है? धार्मिक पर्यटन और विरासत की हिफाजत पर जोर भी योगी सरकार के मौजूदा बजट की अंतर्वस्तु है। काशी विश्वनाथ मंदिर विस्तारीकरण योजना के लिए 207 करोड़, बीएचयू में वैदिक विज्ञान केंद्र की स्थापना के लिए 16 करोड़, मथुरा -वृंदावन के बीच प्रेक्षागृह के निर्माण के लिए 8.38 करोड़, रामलीला स्थलों की चारदीवारी निर्माण के लिए 5 करोड़, वंदावन शोध संस्थान की मजबूती के लिए एक करोड़ का प्रावधान सरकार के संस्कृति प्रेम का द्योतन करता है। पर्यटन विकास के मद्देनजर भी सरकार ने अलग-अलग मद में 373 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। न्याय व्यवस्था सुचारु हो, इस निमित्त अवस्था सुविधाओं यथा आवासीय और अनावासीय भवनों के निर्माण,इलाहाबाद उच्च न्यायालय में मल्टीलेबल पार्किंग, वकीलों के चैंबर निर्माण और कामर्शियल कोर्ट के संचालन आदि के मद में 1235.86 करोड़ की व्यवस्था सरकार की जनहितकारी सोच का इंगित है। सड़कों, पुलों, संपर्क मार्गों के निर्माण, केंद्रीय मार्ग निधि योजना, उत्तर प्रदेष कोर रोड नेटवर्क परियोजना और यूपी मुख्य जिला विकास परियोजना, आरआईडीएफ योजना और विशेष क्षेत्र कार्यक्रम के तहत सड़कों के निर्माण, मरम्मत और चौडीकरण आदि के मद में कुल 23957 करोड़ का प्रावधान लोक निर्माण विभाग को निर्माण और मरम्मत की बड़ी जिम्मेदारी सौंपता है।

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *