अयोध्या मामला लाख टके का सवाल

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फैसला चुनाव से पहले या बाद में
गोमती आवाज ब्यूरो
लखनऊ। यह सत्य है कि देश की राजनीतिक दिशा बदल देने वाले अयोध्या के राम जन्मभूमि विवाद का हल अब बहुत दूर नहीं है लेकिन सवाल सिर्फ इतना है कि उच्चतम न्यायालय से फैसला लोकसभा चुनाव के पहले आता है या बाद में। मंदिर निर्माण के पक्षधर और भारतीय जनता पार्टी के समर्थक चाहते हैं कि अदालती निर्णय चुनाव से पहले आये जबकि भाजपा विरोधियों की पुरजोर कोशिश है कि इसे किसी तरह चुनाव तक टाला जाये। इसीलिये न्यायालय में तारीख पड़ते ही मंदिर निर्माण समर्थकों की तीखी टिप्पणियां आनी शुरू हो जाती हैं। श्री रामजन्म भूमि के प्रधान पुजारी आचार्य सत्येन्द्र दास कहते हैं कि मंदिर निर्माण के पक्ष में फैसला जल्दी से जल्दी आना चाहिये लेकिन वह यह भी कहते हैं कि फैसले को चुनाव से नहीं जोड़ा जाना चाहिये। संकुचित विचारधारा वाले लोग चाहते हैं कि चुनाव से पहले इसका फैसला आना चाहिये क्योंकि उन्हें अपने काम पर भरोसा नहीं है। ऐसे लोग मंदिर की नैया पर सवार होकर चुनावी वैतरणी पार होना चाहते हैं। उनका कहना था कि न्यायालय पर दबाव बनाना उचित नहीं है। न्यायालय को अपना काम करने देना चाहिये। वह कपिल सिब्बल के उस बयान को भी गलत बताते हैं जिसमें न्यायालय से इस मामले को 2019 के बाद सुनवाई करने का आग्रह किया गया था। उन्होंने कहा कि देश और समाज हित में इस मामले का जल्द से जल्द हल होना चाहिये लेकिन न्यायालय को समय सीमा में बांधने की कोशिश मेरे ख्याल से अनुचित है। बाबरी मस्जिद के पैरोकार इकबाल अंसारी कहते हैं कि इस मामले के निर्णय में भले ही थोड़ा समय लग रहा है, पर न्यायालय के फैसले को मुसलमान सर झुकाकर मानेगा। राम जन्मभूमि बाबरी मस्जिद की सुनवाई को 29 जनवरी तक स्थगित होने के बाद इकबाल अंसारी ने कहा कि न्यायालय पर दबाव बनाना अनुचित है। उधर, मंदिर समर्थक फैसला जल्द चाहते हैं। श्री राम जन्म भूमि न्यास के सदस्य और पूर्व सांसद राम विलास वेदांती ने कहा कि कांग्रेस नहीं चाहती कि मामले पर फैसला जल्द हो। संत मुकदमे में तारीख पर तारीख पडऩे पर नाराज हैं। अयोध्या के संतों ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सुनवाई टालने को लेकर अब संत 31 जनवरी और एक फरवरी को प्रयागराज के कुम्भ में आयोजित धर्म संसद में विचार करेंगे। वेदांती ने कहा कि कांग्रेस और सुन्नी वक्फ बोर्ड जल्द फैसला नहीं चाहते।  इस मुकदमे अब पांच जजों की संवैधानिक पीठ का फिर से गठन किया जाएगा। उच्चतम न्यायालय में सुनवाई के दौरान आज पांच जजों की पीठ में शामिल जस्टिस यूयू ललित के इस मामले से खुद को अलग कर लिया जिसके बाद अब पीठ का गठन फिर से किया जाएगा। मामले की अगली सुनवाई अब 29 जनवरी को होगी।

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