गठबधंन से शिवपाल को हो सकता है फायदा

राजनीति

राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि गठबंधन से शिवपाल की पार्टी को प्रत्याशी और वोट दोनों मिलेंगे
गोमती आवाज ब्यूरो
लखनऊ। लोकसभा चुनाव के मद्देनजर समाजवादी पार्टी (सपा) और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के गठबंधन का हिस्सा नहीं होने के बावजूद पहली बार चुनाव लड़ रहे शिवपाल की प्रगतिशील समाजवादी पार्टी (लोहिया) को भी इससे लाभ पहुंचने की सम्भावना है। राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि गठबन्धन से शिवपाल की पार्टी को प्रत्याशी और वोट दोनों मिलेंगे। अभी यह नहीं कहा जा सकता कि उनकी पार्टी सीट कितना जीतेगी लेकिन यह तय है कि प्रत्याशी और वोट दोनों ही मिलेंगे। सपा और बसपा के गठबंधन से शिवपाल की पार्टी को फायदा पहुंचेगा, क्योंकि सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव जिन सीटों को बसपा के लिये छोड़ेंगे, उस क्षेत्र के चुनाव लडऩे के इच्छुक सपा नेताओं में प्रगतिशील समाजवादी पार्टी लोहिया की तरफ झुकाव बढ़ सकता है। ऐसे नेताओं की पहली पसंद शिवपाल की पार्टी हो सकती है। राजनीतिक विश्लेषक और पत्रकार मनोज कुमार कहते हैं कि ऐसे नेताओं का दिल खोलकर शिवपाल स्वागत कर सकते हैं, उन्हें टिकट भी दे सकते हैं। सीटों के बंटवारे की अभी दोनों दलों ने घोषणा नहीं की है, लेकिन माना जा रहा है कि दोनों 37-37 सीटों पर लड़ेगे। ऐसी स्थिति में 43 सीट पर सपा अपने उम्मीदवार नहीं उतारेगी। इन सीटों पर पांच साल चुनाव लडऩे की तैयारी करने वाले नेता शिवपाल की ओर मुंह करेंगे, इन्हें वहां से चुनाव लडऩे का मौका मिल सकता है। मनोज कुमार कहते हैं कि जहां सपा उम्मीदवार होगा, वहां प्रगतिशील समाजवादी पार्टी लोहिया की दाल गलनी मुश्किल होगी क्योंकि दोनों का वोट बैंक लगभग एक ही है,इसलिये वहां के मतदाताओं की पहली पसन्द सपा ही होगी, क्योंकि बसपा और अन्य भाजपा विरोधी मतदाताओं का भी समर्थन भाजपा को मिल रहा होगा। हालांकि, यह भी कहा जा रहा है कि प्रगतिशील समाजवादी पार्टी गठबन्धन का कुछ वोट काट सकती है, लेकिन इससे परिणाम कितना प्रभावित होगा। इसके लिये तो अभी इन्तजार करना होगा।

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