वर्ष 2022 तक सभी चीनी मिलों में एथेनाल बनना हो जायेगा शुरू

राजनीति

योगी सरकार बनने के बाद इसकी संख्या बढ़कर 28 लाख पहुंची
गोमती आवाज ब्यूरो
लखनऊ। किसानों की आर्थिक स्थिति को और बेहतर बनाने में जुटी योगी आदित्यनाथ सरकार ने कहा है कि वर्ष 2022 तक सभी चीनी मिलों में एथेनाल बनाना शुरू हो जायेगा। उत्तर प्रदेश के गन्ना राज्य मंत्री (स्वतन्त्र प्रभार) सुरेश राणा ने कहा कि किसानों की आय बढ़ाने और पेट्रालियम पदार्थो पर निर्भरता कम करने के लिये 2022 तक सभी चीनी मिलों में एथेनाल बनना शुरू हो जायेगा। इससे पेट्रोलियम पदार्थों के दामों में कमी आयेगी और किसानों को भी फायदा होगा। उन्होंने कहा कि इससे मिलों की भी आमदनी बढ़ेगी और वे किसानों का भुगतान प्राथमिकता के आधार पर कर सकेंगे। वर्ष 2030 तक एथेनाल कम से कम 30 फीसदी पेट्रोल में मिलाना शुरू कर दिया जायेगा। उन्होंने बताया कि केन्द्र सरकार ने इस सम्बन्ध में कुछ दिन पहले ही कानून बनवा दिया है। राणा ने कहा कि चीनी बनाने की कीमत करीब 34 रुपये प्रति किलोग्राम पड़ रही है। इसी वजह से कभी-कभी किसानों को भुगतान में समस्या आती है। एथेनाल बनने पर मिलों की भी आय बढ़ेगी, जिसका फायदा किसानों का मिलेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी दलों ने गन्ने को लेकर केवल राजनीति की है लेकिन अब काम हो रहा है। लीवर वाल्व लगाकर मिलों को एथेनाल,शीरा या चीनी बनाने की स्वतन्त्रता दी जायेगी। मिल बाजार में चल रहे भाव के अनुसार तीनों में से किसी एक को बनाने के लिये स्वतन्त्र होंगे। उन्होंने कहा कि इस पेराई सत्र में लगभग सभी चीनी मिलें चालू हो गयी हैं। किसानों को जल्द से जल्द भुगतान करने के सख्त निर्देश हैं। गन्ना राज्य मंत्री ने बताया कि पर्चियों में होने वाली धांधली को रोकने के लिये अब एसएमएस से भी इसे भेजने का निर्णय लिया गया है। इसके साथ ही बेसिक कोटा बढ़ाते हुये पर्चियां खतौनी और आधार कार्ड के अनुसार ही देने का फैसला किया गया है। इसके साथ ही पर्चियों को छापने का अधिकार मिलों के बजाय सोसाइटी को दिए गए हैं। उन्होंने बताया कि किसानों के उत्पाद का अच्छा दाम दिलाने के लिये क्रशर को स्थापित करने की दूरी 15 किलोमीटर से घटाकर आठ किलोमीटर कर दिया गया। इससे किसानों को काफी फायदा होगा। गन्ने की ढुलाई का भाड़ा भी कम किया गया है। उन्होंने बताया कि सरकार की बेहतर नीतियों की वजह से उत्तर प्रदेश देश में चीनी उत्पादन में अव्वल नम्बर पर है। पिछले सत्र में चीनी के कुल उत्पादन का 38 फीसदी उत्तर प्रदेश में हुआ था। चीनी का कटोरा कहे जाने वाले पूर्वांचल की मिलों की दुर्दशा को देखते हुये ही उस इलाके को फिर से गन्ना उत्पादन में अव्वल बनाने की कोशिश की जा रही है। राणा ने कहा कि मायावती सरकार ने 21 चीनी मिलों को बेच दिया था। निजी क्षेत्र की 12 मिलें बन्द हो गयी थी। भाजपा की सरकार बनते ही दो नई मिले स्थापित की गयी, जबकि दो की क्षमता बढ़ाई गयी और तीन बन्द मिलों को शुरू कराया गया। गन्ना राज्य मंत्री ने बताया कि किसान पोर्टल को अन्नदाताओं से जोडऩे की प्रक्रिया को तेज किया गया है। पहले मात्र 25 हजार किसान इससे जुड़े थे। योगी सरकार बनने के बाद इसकी संख्या बढ़कर 28 लाख पहुंच गयी है। किसानों को भुगतान के लिये चीनी मिलों को सहूलियत दी जा रही है।

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