कोटेदारों को अपने रक्त संबंधियों को दुकानें नामित करने का अधिकार देना गलत: रालोद

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गोमती आवाज ब्यूरो
लखनऊ। राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) ने शुक्रवार कहा कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली के अंतर्गत सूबे में कोटेदारों को अपने रक्त संबंधियों को दुकानें नामित करने का अधिकार देना गलत होगा। रालोद के प्रदेश प्रवक्ता सुरेन्द्रनाथ त्रिवेदी ने यहां कहा कि भाजपा के शासन में ऐसा लग रहा है कि जमींदारी प्रथा पुन: दस्तक दे रही है। यही कारण है कि सूबे का खाद्य और रसद विभाग सार्वजनिक वितरण प्रणाली के अंतर्गत ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में दुकानें चलाने वाले कोटेदारों को यह अधिकार देने जा रहा है कि वे दुकानें अपने रक्त सम्बन्धियों को नामित कर सकेंगे। उन्होंने कहा कि ऐसे आदेश से जिन कोटेदारों की दुकानें हैं उन्हें पुस्त दर पुस्त कोटे की दुकानें चलाने का अधिकार मिल जायेगा। इससे अन्य बेरोजगार लोग भविष्य में सार्वजनिक वितरण प्रणाली की दुकानें चलाने से वंचित हो जायेंगे।  प्रवक्ता ने कहा कि प्रदेश में किसानों के मसीहा चौधरी चरण सिंह की सरकार से पहले पटवारी प्रथा लागू थी जिसके माध्यम से पटवारी की नौकरी पीढ़ी दर पीढ़ी चलती थी, लेकिन चौधरी चरण सिंह ने पटवारी प्रथा को समाप्त करके लेखपालों की भर्ती करके समाज में एक क्रान्तिकारी फैसला लिया था। उन्होंने कहा कि बेरोजगारों की विरोधी सरकार खाद्य और रसद विभाग में समाज और प्रदेश की नब्ज परखने का तरीका निकाल रही है। यदि यह सफल हो गयी तो भविष्य में जमींदारी प्रथा तक पहुंचने में भारतीय जनता पार्टी कोई कसर नहीं उठाएगी, क्योंकि भाजपा की सरकारें पूंजीपतियों के हित में काम करती हैं।  श्री त्रिवेदी ने कहा कि देश और समाज को नई दिशा देकर सामंजस्य स्थापित करने के लिए चौधरी चरण सिंह की नीतियां ही मददगार हो सकती हैं। देश की अर्थव्यवस्था और सामाजिक न्याय के क्षेत्रों में चौधरी साहब की नीतियां लागू करने से संतोष जनक उपलब्धि मिल सकती है।

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