शांति का संदेश देते हैं सभी धर्म: राज्यपाल

राजनीति

गोमती आवाज ब्यूरो
लखनऊ। उत्तर प्रदेश के राज्यपाल राम नाईक ने कहा कि सभी धर्म शांति का संदेश देते हैं। शांति की आवश्यकता पहले भी थी और आज भी है। गीता, बाईबिल, वेद, कुरान, गुरू ग्रंथ साहिब जैसी पवित्र किताबें शांति और सद्भाव का संदेश देती हैं। राज्यपाल गुरुवार को आईटी कालेज लखनऊ द्वारा आयोजित संगोष्ठी का दीप प्रज्जवलन कर उद्घाटन किया। राज्यपाल ने कहा कि भारतीय संस्कृति वसुधैव कुटुम्बकम् की परिचायक है। जब पूरा विश्व एक पूरा परिवार हो तो वहाँ झगड़ा नहीं प्रेम और शांति होगी। तेरा और मेरा का भाव संकुचित विचारधारा वाले करते हैं। विशाल हृदय वालों के लिये पूरा विश्व एक परिवार है। उन्होंने कहा कि हम आपसी संवाद से हर समस्या का समाधान कर सकते हैं। राम नाईक ने आईटी कालेज की सराहना करते हुये कहा कि आईटी कालेज देश के शिक्षण संस्थानों में 40 वें स्थान पर है। महिला शिक्षा के प्रचार-प्रसार में कालेज की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। 22 करोड़ की आबादी वाले प्रदेश में महिला शिक्षा अपने आप में महत्वपूर्ण है। महिला शिक्षा को लेकर उत्तर प्रदेश में नया चित्र देखने को मिल रहा है। राज्यपाल ने कहा कि प्रदेश में महिलाओं की शिक्षा का प्रतिशत बढ़ाने का श्रेय पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के ‘सर्व शिक्षा अभियान और वर्तमान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘बेटी बचाओ – बेटी पढ़ाओ’ को जाता है। इस अवसर पर पूर्व मंत्री डॉ. अम्मार रिज़वी, बिशप डॉ. फिलिप्स मसीह, ग्लोबल एजुकेशन के महासचिव डॉ. अमॉस नासिमेन्टो, डॉ. फ्लोरिटा वी. मिरिन्डा, विभिन्न देशों से आये प्रतिनिधिगण व कालेज के शिक्षकगण उपस्थित थे। इस अवसर पर बिशप डॉ. फिलिप्स मसीह ने राज्यपाल को शॉल और स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया।

राम मंदिर पर अध्यादेश लाना केन्द्र सरकार का अधिकार: राम नाईक
वाराणसी। उत्तर प्रदेश के राज्यपाल रामनाईक ने कहा कि अयोध्या में राममंदिर निर्माण के लिए अध्यादेश लाना है कि नहीं केन्द्र सरकार का यह अधिकार है। केन्द्र सरकार इस पर विचार करती है कि नहीं यह राज्यपाल के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता। राज्यपाल शुक्रवार को सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्ववियालय के 36वें दीक्षान्त समारोह में भाग लेने के बाद मीडिया से रूबरू थे। राज्यपाल ने कहा कि मामला उच्चतम न्यायालय (सुप्रीम कोर्ट)में चल रहा है, वह विचाराधीन है। इस लिए इस विषय पर टीका टिप्पणी नहीं की जा सकती। अध्योध्या में मंदिर निर्माण से जुड़े सवाल पर उन्होंने कहा कि अध्यादेश लाना केन्द्र सरकार का कार्य है। इस पर देश के राष्ट्रपति विचार विनिमय कर सकते हैं। संसद में निजी बिल लाने के सवाल पर उन्होंने कहा कि इसकी एक प्रक्रिया होती है। प्रक्रिया में अध्यादेश लाने के बाद लोकसभा में विचार होता है। इस पर राज्यसभा के अध्यक्ष ही विचार कर सकते है।

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