दीपोत्सव में ‘दीदियों’ के दियों से होगा उजाला

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खुर्जा के मूर्तिकार मूर्ति बनाने के लिए देंगे प्रशिक्षण
गोमती आवाज ब्यूरो
लखनऊ। आयुक्त ग्राम्य विकास व उत्तर प्रदेश ग्रामीण आजीविका मिशन के निदेशक नागेन्द्र प्रसाद सिंह ने कहा कि 06 नवम्बर को अयोध्या में दीदियों के दियों से उजाला होगा। वे दीपोत्सव कार्यक्रम में मिशन द्वारा गठित विभिन्न जनपदों की स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को जोडऩे का आवाहन किया। कहा कि ‘दीदियोंदीपोत्सव में ‘दीदियों’ के दियों से होगा उजाला द्वारा निर्मित अगरबत्ती, मोमबत्ती, रूई इत्यादि का प्रयोग भी इस दीपोत्सव में किया जाय। वे उत्तर प्रदेश ग्रामीण आजीविका मिशन के निदेशक नागेन्द्र प्रसाद सिंह फैजाबाद, अम्बेडकरनगर, सुल्तानपुर, बाराबंकी तथा बस्ती जनपदों के उपायुक्तों को अपने कार्यालय कक्ष में बैठक के दौरान निर्देश दे रहे थे। उन्होंने कहा कि इन जनपदों में स्वयं सहायता समूह की महिलाओं द्वारा मिट्टी का दिया, बाती, मोमबत्ती, अगरबत्ती आदि को निर्मित किया जाता है। इस वर्ष अयोध्या में मनाये जाने वाले दीपोत्सव में इन्हीं के द्वारा निर्मित पूजा सामग्री का प्रयोग किया जाय। इससे इन महिलाओं की आय में वृद्धि होगी तथा इनका उत्साहवर्धन भी होगा। मिशन निदेशक ने बताया कि इस बार दीपोत्सव कार्यक्रम में 03 लाख दीपों का प्रयोग किया जायेगा। पिछले वर्ष 02 लाख मिट्टी के दीपों का प्रयोग किया गया था। श्री सिंह ने बताया कि इस वर्ष दीपों का आकार बढ़ाया जा रहा है ताकि देर तक दीप प्रज्ज्वलित रहे। उन्होंने बताया कि इस बार स्वयं सहायता समूहों द्वारा बनाये जा रहे दीपों पर ‘प्रेरणादीपोत्सव में ‘दीदियों’ के दियों से होगा उजाला अंकित रहेगा जिससे इन स्वयं सहायता समूहों को आम जनमानस में पहचान मिल सके। श्री सिंह ने कहा कि त्योहारों पर मिट्टी के दियों के अतिरिक्त मूर्ति इत्यादि को भी लोग बहुतायत संख्या में खरीदारी करते हैं। उन्होंने प्रदेश की स्वयं सहायता समूहों की ऐसी महिलाओं को चिन्हित करने को कहा जो मूर्ति इत्यादि बनाने का कार्य करती हैं। श्री सिंह ने कहा कि ऐसी महिलाओं को खुर्जा से मूर्तिकारों को बुलाकर प्रशिक्षित किया जाय। इससे इन महिलाओं द्वारा कलात्मक मिट्टी के दियों के साथ-साथ लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियों का निर्माण किया जायेगा और बाजार में अपने उत्पादों के माध्यम से अन्य उत्पादकों की श्रेणी में शामिल होंगे। कहा कि पूरे प्रदेश में पॉलिथीन तथा उससे जुड़े उत्पादों को बंद कर दिया गया है ऐसी स्थिति में कुल्हड़ तथा पत्तलों की मांग बाजार में तेजी से बढ़ रही है। इसलिए जिन स्वयं सहायता समूहों द्वारा कुल्हड़, दोना-पत्तल इत्यादि का निर्माण किया जा रहा है उन्हें प्रोत्साहित करते हुए बाजार की मांग के अनुसार डिजाइनर कुल्हड़, पत्तल तथा दोना इत्यादि का निर्माण कराया जाय और इन्हें बाजार से जोड़ भी जाए। एनपी सिंह ने कहा कि आने वाले महिनों में कई त्योहार आ रहे हैं जिनमें मिट्टी का दिया, बाती, मोमबत्ती, अगरबत्ती, रक्षासूत्र तथा रूई आदि का प्रयोग होगा। इन उत्पादों को अभी से बनाने हेतु स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को प्रोत्साहित किया जाय और जहां जरूरत हो वहां आर्थिक मदद भी की जाय। उन्होंने कहा कि नवरात्रि तथा दीपावली में इन पूजा सामग्रियों को गांव-गांव तथा मंदिरों के सामने रख इनको प्रदर्शित करने के साथ ही बिक्री भी की जाय। बताया कि देवरिया में स्वतंत्रा दिवस के अवसर पर स्वयं सहायता समूह द्वारा बनायी गयी झालरों को शासकीय कार्यालयों में लगाया गया था। उन्होंने इस झालर को ‘प्रेरणादीपोत्सव में ‘दीदियों’ के दियों से होगा उजाला नाम देते हुए इसके उत्पादन को भी बढ़ाने का निर्देश दिया। कहा कि दीपोत्सव के अतिरिक्ता भी घरों तथा प्रतिष्ठानों में बिजली की झालरों का प्रयोग किया जाता है। उन्होंने बताया कि स्वयं सहायता समूह की महिलाओं द्वारा बनाये गये उत्पादों की कीमत बाजार से काफी कम है। इससे आम आदमी का खर्च काफी कम होगा तथा स्वयं सहायता समूह की महिलायें भी आर्थिक और सामाजिक रूप सशक्त होंगी।

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