सियासी गलियारों में मची हलचल

राजनीति

वीरपाल यादव ने सपा से दिया इस्तीफा
बरेली में वीरपाल सपा के 21 वर्ष रह चुके है जिलाध्यक्ष
गोमती आवाज ब्यूरो
लखनऊ। रुहेलखंड मंडल में समाजवादी पार्टी के भीष्म पितामह कहे जाने वाले, मुलायम सिंह यादव के बेहद करीबी और पूर्व राज्यसभा सदस्य वीरपाल सिंह यादव ने सपा की प्राथमिक सदस्यता और सभी पदों से बुधवार को इस्तीफा दे दिया। इसके अलावा उनके करीब 50 समर्थकों ने भी इस्तीफा दिया है। पिछले दिनों अपने खिलाफ रिपोर्ट दर्ज होने पर पार्टी से सहयोग न मिलने और पार्टी नेताओं द्वारा सम्मान न दिए जाने पर उन्होंने इस्तीफा दे दिया। पार्टी से इस्तीफा देने के बाद वीरपाल यादव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए कहा कि वह किसी सेक्युलर पार्टी में शामिल होंगे, बशर्ते अगर उनसे संपर्क किया जाता है। शिवपाल यादव की पार्टी के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि अभी वहां जाने का इरादा नहीं है। सपा छोडऩे की वजह के पीछे उन्होंने उमरिया मामले में दिए गए बयान पर मुकदमा दर्ज होने को बताया है। उन्होंने बताया कि उनके खिलाफ रिपोर्ट दर्ज होने पर पार्टी से सहयोग नहीं मिला। वहीं, पिछले दिनों जब वह लखनऊ में आयोजित पार्टी की बैठक में गए थे तो वहां बड़े नेताओं ने उन्हें तरजीह नहीं दी। इसके चलते उन्होंने अपने करीब 50 समर्थकों के साथ समाजवादी पार्टी की प्राथमिक सदस्यता और सभी पदों से इस्तीफा दे दिया है। बरेली में वीरपाल यादव 21 साल जिलाध्यक्ष के पद पर रहे चुके हैं। पूरे रुहेलखंड मंडल समेत पश्चिमी उत्तर प्रदेश में पार्टी में उनकी अच्छी पकड़ थी। मुलायम सिंह यादव के बेहद करीबी होने के कारण एक समय पार्टी में उनकी तूती बोलती थी। मगर 2017 विधानसभा चुनाव से पहले सपा में हुई घरेलू कलह का खमियाजा उन्हें भी भुगतना पड़ा। इसके बाद उन्हें जिलाध्यक्ष पद से हटाते हुए शुभलेश यादव को कमान सौंप दी गई। पूर्व दर्जा प्राप्त मंत्री वीरपाल यादव के सपा से इस्तीफा देने के बाद सियासी गलियारों में हलचल मच गई है। वीरपाल यादव जैसे दिग्गज नेता के सपा छोडऩे के बाद पार्टी में उठापटक बढऩे की आशंका जताई जा रही है। यहां तक कहा जा रहा है कि इसके बाद सपा में अंर्तकलह और बढ़ सकती है। फिलहाल, वीरपाल यादव के इस्तीफे के बाद आगामी लोकसभा चुनाव में कई चुनावी समीकरण बदलने वाले हैं।

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