नये भारत की कल्पना को साकार करेगा विज्ञान कुंभ

Opinion

उत्तर प्रदेश में भारतीय अंतरराष्ट्रीय विज्ञान महोत्सव का आयोजन विकास के क्षेत्र में बड़ी परिघटना है। तीन दिनों तक विज्ञान को लेकर जो अंर्तमंथन हुआ है, उससे उत्तर प्रदेश ही नहीं, पूरे देश का विकास होगा। इससे नरेंद्र मोदी के नये भारत के विकास की, स्किल इंडिया की, सजग और सतर्क भारत की, अपने दायित्वों के प्रति जवाबदेह और लोक कल्याणकारी भारत की अवधारणा न केवल पुष्ट होगी, बल्कि इससे हर भारतीय को अपने देश के लिए कुछ अलहदा करने की प्रेरणा मिलेगी। भारतीय अंतरराष्ट्रीय विज्ञान महोत्सव का शुभारंभ करते हुए देश के प्रथम नागरिक रामनाथ कोविंद ने कहा कि विज्ञान भारत की संस्कृति है। हरित क्रांति से लेकर अंतरिक्ष अभियान तक सब विज्ञान की देन है। स्वच्छ भारत मिशन एक वैज्ञानिक पहल है। मिशन इंद्रधनुष व आयुष्मान भारत सहित सभी योजनाएं विज्ञान से ओतप्रोत हैं। राष्ट्रपति ने कहा कि हम जुगाड़ तकनीकी को विकसित कर उसे सही वैज्ञानिक पहचान दे सकते हैं। महोत्सव को जुगाड़ तकनीक कहना कदाचित सही नहीं है लेकिन सपोर्टिंग सिस्टम भी विज्ञान का अपरिहार्य अंग है, इस बात को तो समझना ही होगा। अगर इसे भारतीय कौशल कहा जाए, जिसका लोहा पूरी दुनिया मानती है तो ज्यादा अच्छा होता। राष्ट्रपति ने भारतीय अंतरराष्ट्रीय विज्ञान महोत्सव को विज्ञान का महाकुंभ कहा है तो यह कदाचित गलत भी नहीं है। इस आयोजन में देश भर से तकरीबन चार हजार प्रतिनिधियों की उपस्थिति इस कार्यक्रम को जानदार और शानदार बनाती है। निश्चित रूप से यह आयोजन विद्यार्थियों को विज्ञान के प्रति सोचने-समझने और आगे बढऩे की प्रेरणा देगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नवोन्मेष की तरफ पूरी दुनिया का ध्यान आकृष्ट किया है। हालांकि ‘एक आइडिया जो बदल दे आपकी दुनिया’ जैसे प्रचार इस देश में बहुत पहले नुमाया होने लगे थे। विज्ञान दरअसल ऋषि चिंतन है। हमारे ऋषि-मुनीयों ने जो एकांत चिंतन किया, उससे जो नवनीत निकला, वह अपने आप में सर्वांग विज्ञान है। नरेंद्र मोदी ने पहले योग को पूरी दुनिया में प्रतिष्ठा दिलाने का काम किया और अब वे विज्ञान के आयोजनों के जरिये देश को आगे ले जाना चाहते हैं। पूरी दुनिया को यह दिखाना और बताना चाहते हैं कि विज्ञान की खोज भारत से शुरू हुई थी और भारत के पास आज भी बहुत बड़ी मेधावी और वैज्ञानिक चेतना है, बस उसे उसका बल याद दिलाने की जरूरत है। ‘उत्तराखंड के निवेशक सम्मेलन में भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुलकर यह बात कही है कि आर्थिक क्षेत्र से पर्यावरणीय क्षेत्र की ताकत बहुत बड़ी है। जाहिर तौर पर उनका इशारा पर्यावरण विज्ञान की ओर है। अर्थ का अपना विज्ञान है लेकिन जब तक वह पदार्थ विज्ञान से नहीं जुड़ता तब तक उसकी अपनी कोई अहमियत नहीं है। इससे जीवन में जो कुछ भी दृश्य और अदृश्य है, सब विज्ञान है। विज्ञान कहते हैं विशेष ज्ञान को। यह विशेष ज्ञान किसी को भी किसी भी क्षेत्र में हो सकता है। विज्ञान का अपना अनुशासन होता है। अनुशासन में रहकर ही हम विज्ञान की ताकत का सम्यक लाभ उठा सकते हैं। रासायनिक प्रयोग करने वाले इस बात को बेहतर जानते हैं। क्रिया और प्रतिक्रिया का सिद्धांत भी एक विज्ञान है तो बिना कारण के कार्य नहीं होता, यह अवधारणा भी विज्ञान है। इसलिए विज्ञान को जुगाड़ तकनीकी का विकास नहीं कह सकते। विज्ञान प्रयोग और अनुसंधान की सर्वोच्च अवस्था का नाम है। तीन दिनों में भारतीय अंतरराष्ट्रीय विज्ञान महोत्सव में जितने भी प्रदर्शन सामने आए, उसके निर्माण में देश और प्रदेश की बेहतरी का एक संकल्प झलकता है। इससे यह प्रमाणित है कि देश के भले के लिए, जन सुविधा के विस्तार के लिए हर कोई कुछ न कुछ कर रहा है लेकिन उसका प्रयास एकाकी है, उसकी झिझक उसे आगे नहीं आने देती। इस विज्ञान कुंभ में बहुत सारे युवाओं की प्रतिभा देखने को मिली है। उन्हें एक मंच मिला है। इससे उनकी सोच, उनकी खोज को एक्सपोजर मिल रहा है। कोई ई साइकिल बना रहा है तो कोई ऐसा संयंत्र बना रहा है जिससे एक लीटर गैस से कोई मोटरसाइकिल 120 किलोमीटर तक चल सके। कोई किसानों की चिंता कर रहा है। धान रोपाई किसानों की बड़ी समस्या है। भोपाल के एक छात्र ने ऐसी मशीन बनाई है जिसमें धान के बिरवे भर दिए जाएं, रोपाई का काम मशीन कर देगी। वह एक दिन में चार एकड़ जमीन में धान की रोपाई करेगी। इसे चलाने के लिए किसानों को बस अपना श्रम लगाना है। ईंधन जलाने की कोई झंझट नहीं। इस तरह के सैकड़ों प्रयोग विज्ञान महाकुंभ में देखने को मिले हैं। मानव जीवन की दैनंदिन जरूरतों को पूरा करने में छात्रों द्वारा तैयार ये मॉडल सहायक हो सकते हैं। अगर इनकी कमियों-खामियों को दूर किया जा सके। अच्छाइयों और खूबियों को उभारा जा सके। हर बच्चे के मन में एक वैज्ञानिक, एक चिंतक, एक समाज सुधारक बसता है, जरूरत है, उसे सही मार्गदर्शन देने की। उसका मनोबल बढ़ाने की। इस कार्यक्रम के जरिये यह सब हो रहा है। इस आयोजन में विज्ञान और अनुसंधान से जुड़े कुछ काउंसलर भी आए। तकनीकी शिक्षण संस्थाओं के अनुभव का विस्तार भी यहां देखने को मिला है लेकिन अच्छा होता कि कुछ स्वनामधन्य चोटी के वैज्ञानिकों को भी इस विज्ञान महाकुंभ में लाने की कोशिश होती, उनका मार्गदर्शन मिलता। ऐसे वैज्ञानिकों के सुझाव मिलते तो इससे भारत की प्रतिभा में चार चांद लगता। उत्तर प्रदेश में अगले साल प्रयाग कुंभ है और इसके पहले कई कुंभ यहां होने हैं। विज्ञान कुंभ को उसका हिस्सा कह सकते हैं, अगर किसी को प्रतिवाद न हो तो। कुंभ जोडऩे का काम करता है। विज्ञान कुंभ भी जोड़ ही रहा है। अपने विशेष ज्ञान से, अनुसंधान से। सरकार को चाहिए कि जिन संयंत्रों से समाज को लाभ होता है, उनके उत्पादन और मार्केटिंग पर भी वह विशेष ध्यान दे। उत्तर प्रदेश में औद्योगिक विकास का माहौल बना है। कल-कारखाने लगेंगे तो धन का प्रवाह बढ़ेगा। धन बढ़ेगा तो धर्म होगा। धर्म होगा तो सुख होगा। नीति भी यही कहती है कि ‘धनात धर्म: तत: सुखं। देश के प्रथम नागरिक रामनाथ कोविंद ने कहा है कि उत्तर प्रदेश हमेशा से ही कुंभ के लिए प्रसिद्ध है। अब यह विज्ञान कुंभ के लिए भी जाना जाएगा। कृषि क्षेत्र में होने वाले इनोवेशन ने किसानों को बहुत राहत दी है। खेती किसानी से जुड़े हर क्षेत्र सिंचाई से लेकर बुआई तक विज्ञान ने प्रगति की है। उन्होंने वैज्ञानिकों का आह्वान किया कि वे ऐसे आविष्कार करें जिससे लोगों का जीवन आसान हो। केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ. हर्षवर्धन कहते हैं कि नैनो तकनीक में भारत पूरे विश्व में तीसरे नंबर पर है। सुनामी वार्निंग देने में हम पहले नंबर पर हैं। साइंटिफिक पब्लिकेशन में हमारा नंबर छठा है। हमने रिकॉर्ड 104 सेटेलाइट छोड़े हैं। प्रधानमंत्री का सपना है कि वर्ष 2030 में इंडिया सर्वश्रेष्ठ तीन वैज्ञानिक देशों में अपना स्थान बनाए। राज्यपाल राम नाईक ने स्वातंत्र्यवीर सावरकर के विज्ञाननिष्ठ समाज की अवधारणा पर बल दिया। उन्होंने भाषा में भी विज्ञान होने की बात की। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की इस बात में दम है भारत की पहचान दुनिया में अपने ज्ञान और विज्ञान के कारण रही है। उन्होंने तुलसी के काढ़े में भी स्वास्थ्य का विज्ञान देखने की जरूरत पर बल दिया। कुल मिलाकर यह आयोजन देश को एक नई दिशा देगा, इसकी उम्मीद तो की ही जा सकती है।

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